दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हे flutter एक क्रॉस-प्लेटफार्म मोबाइल framework है जो की android और ios की एप्प बनाने के काम आता है और दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हे की flutter ज्यादा पुराना framework नहीं है मतलब ये अभी एक latest framework हे और दोस्तों आप ये भी जानते हे की smart mobile आए हुए काफी समय हो गया है तो ऐसे में एक सवाल ये आता हे की जब flutter framework आया ही नहीं था तो उससे पहले mobile एप्प कैसे बनाए जाते थे ?
दोस्तों जब Android आया था उस समय flutter बनाया नहीं गया था उस समय जो Android या ios एप्प बनते थे वो दोनों अलग-अलग language और अलग-अलग प्लेटफार्म पर बनते थे जैसे Android के लिए Java और Kotlin language काम आती थी और ios के लिए Objective-C और C# जैसी programming language यूज़ आती थी और इन्हीं को native languages कहा जाता हे जो की हर एक platform जैसे Android और ios के लिए अलग-अलग हो और इन पर बनाये एप्प केवल एक ही platform support करती है जैसे Android पर बना हुआ एप्प केवल Android devices पर ही काम करेगा ios पर नहीं और ios पर बना एप्प ios पर ही काम करेगा Android पर नहीं।
दोस्तों हम Flutter और Android में फर्क जाने उससे पहले हम ये जान लेते है की Android क्या है और दोस्तों अगर आपको Flutter के बारे में नहीं पता है तो आप यहाँ click करके हमारे Flutter का पोस्ट पढ़ सकते है।
दोस्तों सबसे पहले अपन बात करते है Android के बारे में की Android क्या है ?
दोस्तों आज के समय में ये जानना की android क्या हे उसकी जरूरत नहीं है क्युकी आज हर घर में Android Phone उपलब्ध है। Android ने बहुत ही काम समय में खुदके operating system को काफी अच्छा बना कर आज पूरी दुनिया में अपना नाम कर लिया है आज कल हर किसी के पास महँगा iPhone हो या न हो पर हर किसी के पास आपको Android Phone जरूर देखने को मिलता है, फिर वो चाहे कोई जॉब करने वाला व्यक्ति हो या फिर कोई स्क्रूल में पड़ना वाला बच्चा हो आज कल हर किसी के पास Android Phone है।
दोस्तों Android कोई फ़ोन या फिर कोई एप्लीकेशन नहीं है ये तो एक Operating System है जो की Linux kernel के ऊपर बना है। या फिर हम इसको यह भी बोल सकते है की android एक operating system है जो की Linux OS (Operating System) को modification करके बनाया गया है। दोस्तों वसे तो Android बनाने वाले ने ये कभी सोचा भी नहीं था की वो एक operating system बनाएगा जो की पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा popular होगा क्युकी जिसने Android बनाया है वो पहले camera के ऊपर काम कर रहे थे पर फिर उन्होंने सोचा की आने वाले समय में camera बस एक feature बन कर रहे जायेगा और उसके बाद से ही वो एक operating system पर काम करने लग गए जो की बाद में Android के नाम से famous हुआ। दोस्तों Android को specially touchscreen mobiles के लिए ही बनाया गया है जैसे smartphones और tablets.
Android का इतिहास:-
दोस्तों Android नाम Andy Rubin के नाम पर दिया गया है जो की इसमे मैन owner था और वो अपनी एक टीम के साथ काम कर रहे थे जिसका नाम Open Handset Alliance था बाद में Google ने इसको सन 2005 में खरीद लिया था और उसके बाद google ने Andy Rubin को ही Android Development का मुख्या बना दिया था। दोस्तों Google के Android को ख़रीदने के पीछे की वज़ह थी iPhone क्युकी दोस्तों उस समय iPhone ने पुरे मार्किट में अपना नाम किया हुआ था और Google को कोई ऐसा operating system लाना था जो iPhone के बदले अच्छा चले और उसमे iPhone के मुकबले ज्यादा features हो और तभी google को इस बात का पता चला की कुछ लोग ऐसा ही एक operating system बनाने का काम कर रहे है google ने उनको अपने पास बुला कर अपने लिए काम कराया और बाद में android को खरीद लिया।
दोस्तों Android का सबसे पहला version November 2007 में निकला गया था और उस फ़ोन का नाम था HTC Dream जिसके बाद एंड्राइड लोगो को बहुत ही पसंद आने लगा और Google ने धीरे धीरे उसमे changes या update करके बहुत से Android version निकले जो की आज पूरी दुनिया में फेमस है।
Flutter v/s Native App :-
दोस्तों जैसा की आप जानते ही है की Flutter पर काम करके आप एक ही code-base से दो अलग-अलग प्लेटफार्मों के लिए app बना सकते हो। जो Development के समय और लागत को काफी कम करता है। Native code की तुलना में Flutter code बनाना आसान होता है। Native तकनीकों के लिए, Developers को एंड्रॉइड और आईओएस के लिए दो कोड लिखना पड़ता है, जिसमें अनिवार्य रूप से अधिक समय लगता है।
ऐप प्रदर्शन:-
दोस्तों 2017 में, जब फ़्लटर को Google द्वारा लॉन्च किया गया था, तब इसमें काफी कमियां थी जिसकी वज्ह से Flutter एप्प अच्छे से काम नहीं करते थे और साथ ही Flutter में बने apps का size native में बने apps के मुक़ाबले काफी ज्यादा होता था जिसकी वज्ह से उस समय लोगो को यह बहुत ही काम पसंद आया था। परन्तु समय के साथ साथ Flutter SDK को update करके उसमे काफी कुछ change किया जिसकी वज्ह से आज अगर हम कोई flutter में बनी app चलाते है तो हमे यह पता तक नहीं चलता की वह app flutter में बनी हे या native में।
कोड रखरखाव:-
दोस्तों जैसा की आप जानते ही है Native apps के लिए अपन को 2 अलग-अलग code-base कको maintain करना होता है साथ ही दोनों एप्प के से किसी भी एप्प में अगर कोई bug मतलब कोई भी परेशानि आती है तो उनको अलग-अलग तरह से सही करना होगा और ऐसे में दोस्तों ज़्यादातर changes होते है की आपके दोनों apps में functionality अलग-अलग हो जाए और दोस्तों दोनों apps के codes को आपको अलग-अलग रखना होगा और उनमे से अगर कोई भी code आपसे delete हो जाता है तो उस एप्प को फिरसे बनाना संभब नहीं है।
फ़्लटर ऐप को बनाए रखने के लिए, यह बहुत आसान है क्योंकि दो platform के लिए केवल एक कोड-बेस है और दोस्तों ऐसे में developers को code update या bug सही करने में ज्यादा समय भी नहीं लगता और एक समय पर दोनों platforms की एप्प्स को सही किया जा सकता है और ऐसी में आपको दोनों platform के लिए अलग-अलग एप्प या code-base को manage करने की जरुरत नहीं होती यहाँ आपको सिर्फ एक ही कोड-बेस को रखना होता है और दोस्तों सबसे अच्छी बात यह हे की दोनों platform पर apps का design एक जैसा ही होता है और दोस्तों flutter में hot-reload नाम से एक option होता है जिससे आप अगर अपने flutter एप्प में कुछ changes करते हो तो वो एक click में आपको अपने मोबाइल की स्क्रीन पर दिख जाता है जिससे एप्प डेवलपमेंट काफी fast हो जाता है।
App का size :-
दोस्तों Android और ios platform के लिए native app का साइज बहुत ही काम होता है जिसकी वजह से कुछ लोग आज भी native apps बनाना ही पसंद करते है क्युकी app की size ज्यादा होने पर लोग उसको जल्दी से download नहीं करते जिसकी वजह से आपकी app पर काम downloads आते है एक normal native app की size 500KB से 3-4 MB तक होती है और वही Flutter की अपन बात करे तो Flutter app का size native apps की तरह कम नहीं होता flutter app का size normal app के हिसाब से बहुत ही ज़्यदा होता है जिसकी वजह से बहुत से developer इसको पसंद नहीं करते क्युकी ज्यादातर लोग छोटे या काम size के apps ही download करना पसंद करते है पर दोस्तों अब flutter में काफी updates आ चुके है जिसकी वजह से अब flutter apps का size भी काम किया सकता है।
App बनाने की लागत ?
दोस्तों जैसा की आप जानते ही की 2 अलग-अलग एप्प Android और ios पर काम करने के लिए अपन को 2 अलग-अलग लोगो की जरुरत होगी और दोनों platform के लिए अलग-अलग कोड लिखना होगा ऐसे में सबसे बडी परेशानि की बात आती है की एप्प की लागत क्युकी दोस्तों दोनों को अलग-अलग पैसा देना होगा और 2 एप्प बनने में समय भी ज्यादा लगता है इसलिए आज कल सभी लोग cross-platform को ही सही मानते है क्युकी cross-platform पर एक ही person के द्वारा काम काफी आसानी से किया जा सकता है और इसमें ज्यादा लागत भी नहीं लगती और एक ही साथ Android और ios दोनों के लिए एप्प बन जाते है।
दोस्तों उम्मीद है की आपको मेरा ये पोस्ट पसंद आया होगा और आपके सवालों
के जवाब भी मिल गए होंगे की Flutter और Android Native में क्या फर्क है ?
लेकिन अगर आपको अभी भी कोई प्रसन है Flutter के बारे मे तो आप मुझसे comment करके पूछ सकते है में आपके सवालो का जरूर जवाब दूंगा।
धन्यवाद।


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